HATBHAGO KI AAS ABHI JINDA HAI
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‘न्याय’ मात्र एक शब्द नहीं; एक आवाज है, अधिकार है, उम्मीद...
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‘न्याय’ मात्र एक शब्द नहीं; एक आवाज है, अधिकार है, उम्मीद है।
न्याय मांगने वालों की भीड़ में समाज का वह तमाम शोषित वर्ग है जो न्याय पाने की उम्मीद में है। इसके साथ ही इस भीड़ में है वो संस्कार, सिद्धान्त, आदर्श, विचार और संवेदनशीलता जिसे हम बहुत पीछे छोड़ आये हैं.. फिर न्याय कैसे मिले? क्योंकि न्याय की आधारशिला इन्हीं मानवीय मूल्यों के धरातल पर टिकी है।
यह पुस्तक केन्द्रित है, उन तमाम न्याय मांगने वालों की भीड़ में प्रतिक्षारत शोषित वर्ग पर, जो न्याय पाने की आस लगाये बैठे हैं.. और जिनके मन में कहीं न कहीं यह विश्वास भी है कि एक दिन सवेरा होगा।
- Format:
- Pages: pages
- Publication:
- Publisher:
- Edition:First Edition
- Language:
- ISBN10:
- ISBN13:
- kindle Asin:B07TCJ41LV









